आज हमारे देश में इस ना समझगी का सबसे ब़ड़ा खामियाजा हमारा लोकतन्त्र भुगत रहा है. अपाहिज लोकतन्त्र.
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Friday, March 23, 2018
अपाहिज लोकतन्त्र
आज हमारे देश में इस ना समझगी का सबसे ब़ड़ा खामियाजा हमारा लोकतन्त्र भुगत रहा है. अपाहिज लोकतन्त्र.
Sunday, February 11, 2018
समय के जाले
![]() |
| Paul Bond Fine Art |
निहारती है कभी कभी
अपने बुने जाले के किनारे जा कर
बाहर बिछी हवा की चट्टानें
वैसे ही मैं
यदा कदा
बहुत धीमी सांस
चढ़ आता हूं अपनी बुनी
अन्धेरे की दीवार पर
देखता हूँ उस पार, डरा सहमा
समय की ठोस बिखरी हुई चट्टानें
कल, आज, भविष्य, बहुत पहले, बहुत बाद
सब
यहां वहां पड़े रहते हैं
टुकड़ो टुकड़ो में धूल खाते!
Wednesday, November 22, 2017
Tuesday, November 21, 2017
Wednesday, November 8, 2017
लोकतंत्र
जिन्हें जवाब देना चाहिए
वे प्रश्न पूछ रहे हैं।
जिन्हें कटघरे में खड़ा होना चाहिए
वे निर्णय लिख रहे हैं।
जिन्हें चुप रहना चाहिए
वे लगातार बोल रहे हैं।
यही मेरे देश का लोकतंत्र है।
सरकारें हो या आम आदमी
यही मंत्र है
बातें बहुत बड़ी बड़ी
काम के नाम पर गोला !
Friday, November 3, 2017
हर रोज
बहुत बेहतर है
रोजमर्रा के कामों में
इतना अधिक व्यस्त हो जाना
हर रोज
कि
उनसे बात करने
उन्हें याद करने की
फ़ुरसत ही न हो
जिनसे
कभी प्यार था
अब नहीं है।
चाय पीते हुए
अथाह विस्तृत यात्राओं में
अपने अकेलेपन के साथ
अकेले होना ।
चलती गाड़ी की
खिड़की से
सूदूर शांत क्षितिज
तकना।
किसी खो चुके
ईश्वर की याद में
उदास होना।
यही सब करता हूं
कभी कभी मैं
अपने होने
अपने अस्तित्व की चहारदीवारी
पर बैठ
बाहर देखते हुए
चाय पीते हुए।
Saturday, October 28, 2017
धर्म और काव्य
तथागत !
मिलोगे कभी फिर
तो सुनूंगा मैं
तुमसे तुम्हारी
वह पुरानी कविता ...
"जीवन
दुख है."
और फिर
कहूंगा तुमसे
कि
इस छोटी सी कविता में
मुझे मिला बड़ा सुख है।
धर्म
जब काव्य से छूटता है
तो
टूटता है
उद्धत होता है
कट्टर होता है !
गीत की भाषा में ढलकर
दुख
ईश्वर
जीवन
सत्य
सब वहनीय हो जाते हैं !
सौम्य हो जाते हैं !
Thursday, October 19, 2017
Monday, October 16, 2017
रोज की कहानी
हम सब की
रोजमर्रा की कहानी
हम सब पर
एक जिम्मेदारी होती है।
उसे
कह देना
उससे
निवृत्त हो लेना है।
प्रेम-विवाह
पूरी हुई हमारी
बरसों पुरानी
प्रेम कहानी
आज
तुम्हारे किसिम किसिम के
प्लाजो दुपट्टे कुर्ती फ्राक
अंट गये मेरी हैंगर अलमारियों पर
खो से गये हैं मेरे दो चार
इधर उधर टंगे रहने वाले बेचारे कपड़े !
आज
तुम्हारे टूटे हुए बाल
बिखरे पड़े हैं यहां वहांइस फ्लैट में
नहीं कोई ऐसी जगह जहां वे हैं नहीं
बहुत तेजी से झड़ रहे
केशकाला भी होता दिखे है बेअसर !
अब
पुराने बैचलर किचन में
जाने पर लगता है जाने कहां आ गए हैं
बदल गई शकल सब डब्बी डिब्बों की
उनकी संख्या में भी हुआ है भारी इजाफा
किसमें गरम मसाला किसमें पीसी धनिया
मजाल कि अब मैं यह बोध पाऊं
रहस्य है चहुं दिस घनेरा !
यही तो प्रेम की परिणति सुखद है प्रिये
जब बह चली है झाग सी
वो पुरानी झूठी नफासत
बाथरूम में मेरे शर्ट धुलती
तुम कहां कम किसी अप्सरा से
बच बचा कर जिस खूंखार मां से
गूथते गूथते आटा
तुम करती हो फोन पर
घंटा घंटा भर गल-चऊर !
यही तुम्हारे शब्द तो
हरसिंगार है
Friday, October 13, 2017
अलल बलल
दिमाग कमजोर हो जाता है,
कामन सेन्स चुक जाता है
कहा है किसी बड़े आदमी ने
"लेखन खून थूकने के समान है"
Thursday, October 12, 2017
पिशाचिनी
संसार
भाषा है।
भाषा
माया है।
भाषा ही
भ्रम देती है
बंधती है उसमें
जो है ही नहीं
स्वयं के छद्म विवरण
को विस्तार देती है
संवाद का आभास रचती है
पिशाचिनी !
Sunday, October 8, 2017
फुग्गे जैसी
जब हम किसी को देखते है
आंखों से
तो हम देखते हैं उसके
हाथ पैर
नाक आंख
घुटने गरदन
और इस बीच
हम
पूरी तरह
भूल जाते हैं कि
उसमें एक आत्मा
भी रहती है
फुग्गे जैसी
Friday, October 6, 2017
इतिहास एक क्रम है
इतिहास एक क्रम है
एक गति है
किसी समूह की काल सापेक्ष यात्रा का
जबरदस्ती लिखा गया
अभिलेख !
इस निर्वैयक्तिक विप्लवी प्रवाह में
हमें चुनना होगा
अपना प्रस्थान बिंदु ,
अपना राज्य
अपनी सेनाएं
अपने पुरोहित
अपने शत्रु .
जन्म पूर्व गर्भ में
बनते हुए भ्रूण की कई परतों में
एक अदृश्य परत है ऐतिहासिकी !
पुरानी यात्राओं के संस्मरण !
Thursday, October 5, 2017
लोकतंत्र का मुलजिम
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असली मुलजिम पकड़ा गया
खेत में हल जोतते
ठेला पर लहसुन पियाज बेचते
रिक्सा चलाते
सीमेंट बालू जोड़ते
मुलजिम जकड़ा गया
इसी ने दुबारा दिया भोट
छब्बे बिधायक को दू पाकिट ठर्रा के बदले
दुबारा जीतकर बिधायक ने
ऊठवा लिया तिरभुवन पतरकार को
और घोर के पी गया
झुल्लन की गबरू जवान बिटिया को !
एफाईआर भी नहीं लिखा गया थाने में,
छब्बे बिधायक भी क्या करता
मुलजिम ने दिया था भोट
बनाया था माननीय
लेकिन आज पकड़ा गया !
सड़क के किनारे
बड़ी गोल वाली पाइप में गांजा पीते हुए

