Friday, May 25, 2018

नींद और दुख

शाम से ही
कोई गहरा दुख उस पर फैल सा गया था !

ऐसा कुछ हुआ नहीं था बुरा अभी
बस कोई पुरानी बात
किसी बात का सिरा पकड़
ऊपर आ गयी थी !

आज देर सांझ
जल्दी
थक कर
सो गया वह !

Monday, May 21, 2018

तलाश

कविता
नये दुखों की
तलाश है ! 

Sunday, May 20, 2018

तनख़्वाह

अगले महीने की तनख़्वाह जोहते हम 
भूल जाते हैं अक्सर 
कि अगले महीने की तनख़्वाह के साथ 
कम हो जाएँगे 
हमारी ज़िंदगी के एक महीने ! 

सिर्फ़ तनख़्वाह के लिए 
वक़्त को इतनी जल्दी 
बीत जाने देने का उतावलापन 

क्या कुछ ज़्यादा महँगा नहीं?