Wednesday, November 22, 2017

जुड़ाव

कुछ कविताएं
दुख में लिखी जाएंगी

उससे इतर
किसी अन्य दुख में
पढ़े जाने के लिए।

जो छूट गए

जो
छूट गए

उन्हें
जाने दो !

Tuesday, November 21, 2017

तमाचा

गहरा सन्नाटा
दूर तक बिखरी चुप्पी

दुनिया की
तमाम आवाजों
के मुंह पर

एक करारा तमाचा है।


Wednesday, November 8, 2017

लोकतंत्र

जिन्हें जवाब देना चाहिए
वे प्रश्न पूछ रहे हैं।

जिन्हें कटघरे में खड़ा होना चाहिए
वे निर्णय लिख रहे हैं।

जिन्हें चुप रहना चाहिए
वे लगातार बोल रहे हैं।

यही मेरे देश का लोकतंत्र है।
सरकारें हो या आम आदमी
यही मंत्र है
बातें बहुत बड़ी बड़ी
काम के नाम पर गोला !

Friday, November 3, 2017

हर रोज

बहुत बेहतर है
रोजमर्रा के कामों में
इतना अधिक व्यस्त हो जाना
हर रोज

कि
उनसे बात करने
उन्हें याद करने की

फ़ुरसत ही न हो
जिनसे
कभी प्यार था
अब नहीं है।

चाय पीते हुए

अथाह विस्तृत यात्राओं में
अपने अकेलेपन के साथ
अकेले होना ।

चलती गाड़ी की
खिड़की से
सूदूर शांत क्षितिज
तकना।

किसी खो चुके
ईश्वर की याद में
उदास होना।

यही सब करता हूं
कभी कभी मैं
अपने होने
अपने अस्तित्व की चहारदीवारी
पर बैठ
बाहर देखते हुए
चाय पीते हुए।