Sunday, October 27, 2013

हर्फ़



तुम ,
नीले उजले रंग की 
एक बूंद थी
दवात की बारी पर 
ढरकी हुयी ,
एकाकी, स्वयं में थिर !

मैं,
कलम की नोक की तरह
रहा तुम्हारे पास !

तुम सूख गयी मुझमें...
और हमनें 
लिखे कई  हर्फ़ !

जिन्हें लोग 
उस वक्त बोला किये
जब वे चुप रहे ,
किसी गहरे खोये हुये प्यार
के बारे में सोचते हुये !

वो हर्फ
सूरज, उगने से पहले
फूल, खिलने से पहले
चिड़िया, गाने से पहले
अब,
बांचा करते हैं !! !

उन कुछ
अबूझ और गज़ब के
हर्फ़ों के बारे में
सोचा करता हूं मैं भी
कभी कभी जब
नीले उदास बादलॊं के 
छज्जों में लुढका हुआ
कुछ और 
नहीं सोचना चाहता  !

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर !
    उन कुछ
    अबूझ और गज़ब के
    हर्फ़ों के बारे में
    सोचा करता हूं मैं भी
    कभी कभी जब
    नीले उदास बादलॊं के
    छज्जों में लुढका हुआ
    कुछ और
    नहीं सोचना चाहता !…… बहुत सही !

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  2. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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