Sunday, May 26, 2019

छिटपुट

1.
जो कविताएं
नहीं लिखी गई
मन में उमग कर रह गई
उन्हें घुटन नहीं होती होगी ?
कब्र में दबे होने जैसी ?

2.
उतर आया धुधलका शाम का

खिड़की से दीखता आसमान
शान्त उदास स्थिर,

एक और दिन बीत गया
कभी न लौटने के लिए।

Friday, December 7, 2018

चीनी की तरह

ये जंगल
चीनी की तरह 
एक पुड़िया प्यार 
घोल देते हैं सुबह सुबह 
जिन्दगी के कप में
एक नज़र भर देखने पर ! 



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