Tuesday, October 14, 2014

विचारधाराएँ

कर देती हैं पंगु
संवेदनाओं को
मेरे भीतर के आदमी को
मेरे कवि को ,
विचारधाराएँ
गठिया  रोग हैं।

 

4 comments:

  1. ओह! तभी मैं समझा कि मेरी गतिशीलता काहे कुन्द हो चली है!

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