Monday, September 21, 2009

क्योंकि तुमसे मैं प्रेम नही करता


यह समय
तुम्हारे आने का था !
और तुम
नहीं आये !!!

वैसे तो व्यस्त था मैं
अपने कामों में
जैसे रोज रहा करता हूं
लेकिन फिर भी
मेरे अन्दर से कहीं
कोई भीतरी अदृश्य देह
बार बार
मेरी इस देह से निकल
बाहर उस सीढी़ की तरफ़
ढ़ुलक ढ़ुलक जा रही है !


हर बार खुद को बांधता हूं कसकस कर
खेत में पानी बराते नाना
कहीं और हुलसते पानी पर
तावन बांधा करते थे जैसे

जरा भी नहीं चाहता मैं
कि तुम्हारे इन्तजार जैसा
कुछ भी करूं,
तुम्हारी किसी भी आहट को
अपने भीतर सुनुं,
और तुम्हारी आज की इस
आकस्मिक अनुपस्थिति से निर्मित
इस फैलते शून्य को
अपने भीतर
और वृहद होने दूं ,
जरा भी नहीं चाहता मैं

क्योंकि
तुमसे
मैं प्रेम
नहीं करता
थोड़ा सा भी नहीं , बिलकुल भी नहीं

क्योंकि कुछ भी नहीं होता इससे
कि हम रोज मिलते हैं,
बतियाते हैं हसते हैं ठिठियाते हैं ,
एक दूसरे की जिन्दगी को
मूंगफली के खाली ठोंगों की तरह
इधर उधर फेंकते हैं

मार्च महीने की
कुनकुनी ताजी ,
शिवमूरत हलवाई की
एक घुच्चड़ मस्त चाय जैसी सुबह में
सड़क के किनारे घास चरते
तन्मय , निर्लिप्त
दो बकरी के चमकीले मेमनों जैसे
या फिर
पूरा जीवन साथ बिताये
परस्पर किसी भी आकर्षण से रिक्त
दो थके बूढ़े बुढ़ियों की
किसी छोटी सी बात पर
प्रसन्न,
हल्की-सी मुस्कुराती
एक दूसरे से मिली आखों जैसे
हम
कभी कभी एक दूसरे के होने में
थोड़ा बहुत शामिल भी हो जाते हैं

(लेकिन)
सच कहता हूं
कुछ भी नहीं होता इससे !

मेरी नसों में रेगती रहती है एक टीस
जैसे गंजी के नीचे घुसी हो कोई चीटीं
की रिश्ते
सुखाये और पीटॆ जा चुके धानों के
बचे पुआलों के
हुमच हुमच कर कसे गये
बोझ होते है
घुरहू काका जिसे
ठेघुनियां ठेघुनियां कर बांधते हैं
और भूसे वाले घर में पटक आते हैं

इसलिये
प्यार व्यार कुछ नहीं करता मैं तुम्हें
और अपने भीतर दाद की तरह फैलते
इस खाली शून्य को
और फैलने से रोकना चाहता हूं

तुम नहीं आये तो क्या !! !
अभी और बहुत काम है मुझे

(दिस.२००८

3 comments:

  1. मेरी नसों में रेगती रहती है एक टीस
    जैसे गंजी के नीचे घुसी हो कोई चीटीं
    की रिश्ते
    सुखाये और पीटॆ जा चुके धानों के
    बचे पुआलों के
    हुमच हुमच कर कसे गये
    बोझ होते है ...
    गहरी अभिव्यक्ति ।आते रहो । कम से कम यहीं मिलना हो जाय ।

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  2. वाह क्या प्यार को व्यक्त करने का अन्दाज है !!!!!!!!!!!!!!

    यह अन्दाज़ मुझे पसन्द आयी.............

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  3. ऐसा!!! बहुत खूब!

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