Monday, December 1, 2008

रेड अलर्ट

वही बगल में , पूना में था , जब हमला शुरू हुआ ! हमने सोचा था की बनारस वापस लौटने से पहले एक दिन बाम्बे भी घूम आयेंगें , राज ठाकरे की मुम्बई देख आयेंगें , लेकिन तब तक पता चला की ताज होटल में कुछ विक्षिप्त वहशी "मौत - मौत " खेल रहे हैं .......सब रेड अलर्ट हो गया है ......

दोस्त ने सुना तो बोला, चलो बहुत दिन से कुछ हुआ नहीं था !बड़ी शान्ति थी ! अब ठीक है ! फिर खबरों पे खबरें , विचार- विमर्श , संकल्प ,संगोष्टियां , वार्तायें ….और फिर अगले धमाके का इंतजार !

कहीं पढ़ा था की धर्म ही सब उन्नतियों का मूल है . देखता हूँ की सब अवनतियों का मूल भी यही है. खासकर तब जब वह अपनी यात्रा के वर्तमान में किसी गहन अंतर्भूत सत्य की उष्णता का अभाव झेलता प्रधानत: बहिर्मुख हो चला हो……

राजनीति या समाजशाश्त्र में वह कूबत नहीं , संलग्न धर्मो (में) / का नवोन्मेष ही इस भयवाद (आतंकवाद) के प्रशमन के कुछ सुंदर सूत्र सुझायेगा………….

1 comment:

  1. वह एलर्ट कहाँ, कहाँ था अभिषेक? तन पर,मन पर, विचार पर, भावनाओं पर.....और भी न जाने कहाँ, कहाँ.
    है न.
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