आर्जव
Saturday, January 22, 2022

हरियाणवी हास्य ग़ज़ल

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थोड़ी देर की ख़ामोशियाँ भी परेशान कर देती थी  क्या हुआ कुछ हुआ क्या की फ्रिक हो जाती थी  इश्क़ की शुरुआत के ये दिन भी क्या दिन थे , अच्छा!  ...
Friday, January 21, 2022

हस्तक्षेप

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  यह   जगह   किसी   और   की   स्मृति   में   हैं इस   जगह   की   स्मृति   में   कोई   और   है   मैं   अपने   वर्तमान   के   साथ   इन   सब   ...
Wednesday, January 19, 2022

माधवी

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  थमनें   दो   नये   नये   परिचय   की उन्मादी   गरज   बरस   धुन्ध   धुएं   से   छाये   आवेगों   की   स्नेहिल   बौछारों   को  !  तुम्हारे   म...
1 comment:
Sunday, January 16, 2022

दिसंबर व धूप

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  दिसंबर   के   कमजोर   अपराह्न   में   सूरज   की   स्मृतियों   से   छीजती   धूप   कमरे   में   तिरछे   दाख़िल   होती   है   शेल्फ़   पर   र...
Friday, January 14, 2022

जीवाश्म

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किसी   लोककथा   में   फँसी   रह   गयी   वेदना   हज़ारों   वर्ष   पुरानी   एक   प्रतिमा   के   मन   की   स्मृतियाँ   बादलों   के   पुराने   ज...

शुरुआत

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सबसे   पहले   देह   में   कहाँ   से   शुरू   होती   होगी   मौत   ?  तमाम   कोलाहलों   के   बाद   गिरी   स्याही   सी     फैलती   होगी    देह ...

व्यक्तिगत सी बात

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किसी   छोटी   जगह   पर   बरसात   बड़ी   ही   व्यक्तिगत   बात   सी   होती     है  !  छोटी   जगह   पर   गिरती   बरसात   को   हमारे   पुराने   ...
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आत्मकथन

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अभिषेक आर्जव
बनारस,दिल्ली , India
"हार कर हर मोरचे पर/ जीत ही मैं लिख रहा हूँ, आज के इस दौर में भी, गीत ही मैं लिख रहा हूँ....... ."
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