आर्जव
Friday, January 14, 2022

जीवाश्म

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किसी   लोककथा   में   फँसी   रह   गयी   वेदना   हज़ारों   वर्ष   पुरानी   एक   प्रतिमा   के   मन   की   स्मृतियाँ   बादलों   के   पुराने   ज...

शुरुआत

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सबसे   पहले   देह   में   कहाँ   से   शुरू   होती   होगी   मौत   ?  तमाम   कोलाहलों   के   बाद   गिरी   स्याही   सी     फैलती   होगी    देह ...

व्यक्तिगत सी बात

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किसी   छोटी   जगह   पर   बरसात   बड़ी   ही   व्यक्तिगत   बात   सी   होती     है  !  छोटी   जगह   पर   गिरती   बरसात   को   हमारे   पुराने   ...
Saturday, January 1, 2022

आत्मा के सपने

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तुम्हारी देह में मैं नहीं खोजता तुम्हारी आत्मा  जिससे छू सकूँ ।  आत्मा देह का सपना है।  टूटने दो ।  तुम्हारे सीने पर जो दो आधे लिखे अक्षर है...

साज़िश

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 सच को दूसरे सिरे से देखने पर  पता चलता है  सच के प्रति हमारी वासना कितनी हिंसक है  सच हर किसी को एक जैसा बना देने की साज़िश है

हम अपने होने की सजा पाते हैं ।

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धीरे धीरे वे सभी लड़कियां  ख़त्म हो गई हैं  जिन्हें मैं प्यार करता था  या कर सकता था ।  ये मेरी अक्षमता नहीं है ।  उदासीनता भी नहीं है ।  ऊब ...
Wednesday, May 20, 2020

पुतली

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by anupriya                                                                   हमारी  पद यात्राओं की थाप से ही                               ...
Saturday, May 16, 2020

मिट्टी

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जब मैं नींद से जागा  मैंने अपनी देह को मिट्टी पाया  हाथ मिट्टी पैर मिट्टी पूरी देह मिट्टी  मैंने अपनी आत्मा खोजनी चाही  मुझे मिला  थोड़ी सी ...
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Friday, May 15, 2020

गति

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मैं डरता हूं वह कवि होने से जो अपने ही बिम्बों की फफूंद में भटक  जायेगा.   जो खुद को अपने कहे अर्थों का  जिम्मेदार मानेगा.   ...
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Tuesday, May 12, 2020

हवा

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हवाओं को पता है इस दुनिया के सारे रहस्य इसलिए ही वे चुप और अदृश्य रहती हैं । हवाएँ धरती की आत्मा हैं । मिट्टी पहाड़ सूरज नदी आदमी...
Saturday, May 9, 2020

अभिव्यक्ति

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लकड़ी   में   छुपी   आग   हवा   में   चिड़िया   की   उड़ान   मिट्टी   में   पहाड़ पत्थर   में   समय   देह   में   मौत   ...
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जिम्मेदारी

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भूख के लिए ज़िम्मेदार ठहरायी गई  रोटी !  जीवन की दुर्घटना के लिए  किया गया कटघरे में खड़ा  हवाओं को !  नदी ने जब अपनी बात कही  तो माना गया उ...
Friday, May 8, 2020

ईश्वर की पालिटिक्स

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उसके बनाये लोग  जानने न लगे एक दूसरे को इसलिए उसने गढ़ी भाषा  प्रेम में हारे  तमाम लोग  उसे तलाश न लें एक साथ इसलिए उसने खड़े किये  पूजाघर  ...
Wednesday, May 6, 2020

अन्तहीन कथाओं की तलाश

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Image from internet कोई पुरानी इमारत कोई पिछले जमाने का किला कोई ऐतिहासिक खण्डहर ये सब समय की चादर में बारीक सुराख से होत...
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Sunday, May 3, 2020

बरसात जब होती है

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Pic From  https://paintingvalley.com/rain-drawing बरसात जब होती है सड़कें गलियां मिट्टी सब भींग जाते हैं. हर तरफ हर चीज न...
Friday, May 1, 2020

दिशाएं

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ईश्वर  अकेला होता हुआ  प्रेम है । प्रेम  दुनिया की लौटता हुआ  ईश्वर है ।  वैरागी को वहम था कि उसे ईश्वर चाहिए !
Thursday, April 30, 2020

प्रतीकों के बाहर

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घर को चला है मजदूर लाकडाउन में दो बच्चे भूखे एक  पत्नी  बीमार  उस का सामान हैं। दूर नहीं घर उसका ...
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आत्मकथन

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अभिषेक आर्जव
बनारस,दिल्ली , India
"हार कर हर मोरचे पर/ जीत ही मैं लिख रहा हूँ, आज के इस दौर में भी, गीत ही मैं लिख रहा हूँ....... ."
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