आर्जव
Thursday, April 30, 2020

प्रतीकों के बाहर

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घर को चला है मजदूर लाकडाउन में दो बच्चे भूखे एक  पत्नी  बीमार  उस का सामान हैं। दूर नहीं घर उसका ...
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Wednesday, April 29, 2020

सभ्यता के ताम्रपत्र

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मैंने देखा है पत्थरों  को काग़ज़ जैसा  जब मैं सम्राट था  मैंने लिखे उन पर  अपने विजय गीत  जब मैं हार गया  मैंने पूजा उन्हें  आस्था के अभिलेख...
Thursday, April 9, 2020

लाकडाउन कथा: कंसपीरेसी सिध्दांतों के बारे में कुछ बातें

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बगल की छत पर शाम को बच्चों के साथ लूडो खेलते दादा जी.
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Wednesday, April 1, 2020

लाकडाउन कथा: कंसपीरेसी सिध्दान्त

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Image from Internet आज लाकडाउन का सातवां दिन है. भारत में अब संक्रमित लोगों की संख्या हजार के पार पंहुच गयी है. मरने वाले २९ के आसपास...
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Tuesday, March 31, 2020

लाकडाउन कथा: प्राग्माटिज्म !

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वीरान सड़कें. दिल्ली गुड़गाव रोड आज चार दिन हो गये सब कुछ बन्द हुये. लाकडाउन. सब कुछ बन्द. दुकानें बन्द, कार्यालय बन्द, लोग बन्द. सड़के ...
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Saturday, November 23, 2019

रात

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रात घिर आयी बे आवाज आसपास ऐसे जैसे  यही कहीं बिखरी हुई थी  आसपास बे आवाज सदियों से
Saturday, October 26, 2019

बँटवारा

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जीतने के लिए दुनिया को बाँटना पड़ता है दो हिस्सों में । साफ़ साफ़ अलग किए गए दो हिस्से। 
Sunday, October 20, 2019

व्यक्ति व समूह

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व्यक्ति पर एक निजी व्यक्ति के रूप में और व्यक्ति पर एक समूह के अवयव के रूप में , मानसिक / आत्मिक विकास के जो नियम ल...
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Sunday, May 26, 2019

छिटपुट

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1. जो कविताएं नहीं लिखी गई मन में उमग कर रह गई उन्हें घुटन नहीं होती होगी ? कब्र में दबे होने जैसी ? 2. उतर आया धुधलका शाम का खिड़की ...
Friday, December 7, 2018

चीनी की तरह

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ये जंगल चीनी की  तरह   एक पुड़िया प्यार   घोल देते हैं सुबह सुबह   जिन्दगी के कप में !  एक नज़र भर देखने पर !  ...
Thursday, November 22, 2018

मठाधीशी की कला

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जरूरी नहीं कि हृदय में ईश्वर का प्रकाश ही आपको व्यावहारिक तौर पर स्थिर, गंभीर, आत्मप्रवृत्त बनाता हो। अपने चित्त के घामड़पन, अपनी कुटिलता की ...
Saturday, November 3, 2018

पहले जैसे

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पत्नी नौकरी फ्लैट कार प्रमोशन के लिए प्रतिस्पर्धा परीक्षा आफिस की तक झक नहीं हो रही सेविंग से लेकर कई दिनों से छूट जा रही जिम और समय न...

सपना

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अक्सर जब कोई सपना सच हो कर आंखों के सम्मुख आता है  आंखें उन्हें चीन्ह नहीं पाती हैं !  आखों के अधूरेपन में सपना सपना ही रह जाता है ! ...
Sunday, October 28, 2018

मच्छरात्मकता

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शान्ति से आलआऊट पीकर दीवार पर बैठे मच्छर को ऊंगली से कोंच कर मार दिया मैंने ! समझ नहीं आता क्या ठीक किया मैंने ! __________________ #क...
Monday, October 8, 2018

दो कविताएं

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दो कविताओं के लिखे जाने के बीच का समय अब बढ़ गया है जीवन ये ही है इस वाक्य के बाद चिह्न कौन सा खड़ा करू ? विस्मयादिबोधक ? प्रश्नवाचक ? पू...
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Sunday, September 23, 2018

परिपूर्ण

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मैं गढ़ू कुछ ऐसी कविताएं जो खुद में पूरी हों बिना किसी पाठक के बिना दुबारा पढ़े गये
Saturday, September 15, 2018

चार्ल्स बडलेयर की पांच कविताएं

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 ( नवोत्पल   पर प्रकाशित इन पांच भावानुवादित कविताओं को अपने ब्लाग पर भी टांग लेने की सोची ! ) चार्ल्स बडलयर उन्नीसवीं सदी ...
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आत्मकथन

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अभिषेक आर्जव
बनारस,दिल्ली , India
"हार कर हर मोरचे पर/ जीत ही मैं लिख रहा हूँ, आज के इस दौर में भी, गीत ही मैं लिख रहा हूँ....... ."
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