आर्जव
Tuesday, August 22, 2017

भ्रम

›
पता ही नहीं है आदमी को कि उसे चाहिए क्या ?

असुर

›
कुछ लोग अपने इसी जीवन के एक हिस्से में बन जाते हैं मानव से असुर, वैसे ही जैसे शास्त्रों में वर्णित हैं असुर बड़े बड़े दांतो वाले झ...
Monday, August 21, 2017

झूठी आशा

›
कविता से नहीं होगा कोई समाज सुधार कोई क्रान्ति भी नहीं आयेगी न ही भरेगा किसी भूखे का पेट ! कविता बस सब कुछ ठीक हो जाने की झूठी आशा ...

हे डीयर प्रभू !

›
From web हे डीयर प्रभू ! कवि न बनने देना ऐसा कि अपनी रचनाएं पूरी होने से पहले ही,  लपालप मित्रों-मित्र...
Sunday, August 20, 2017

घने जगंलों में

›
घने जगंलों में मैं बहुत दूर निकल आया था । बहुत दूर । जगंलों के भीतर बहुत भीतर बेतरतीब बिखरे खोये हुये उन रास्तों के पार जिन...

जापान और हम

›
कला संकाय के किले में शाम को कक्षाएं चलती थी जापनीज़ की।   चार बजे शुरू हो कर छह बजे तक। आकियो सर जो कि टोक्यो निवासी थे, हमें कांजी कतकना...

आज की सांझ

›
पिघले सोने की भट्टी डूब खो गयी स्याह नीलाभ घाटी के गर्भ में, आज की सांझ।
Thursday, August 17, 2017

कुछ शब्द

›
ढूंढता हूं कुछ शब्द छुपा सकें जो गहरे मेरे सन्नाटों को ! रच सकें जो ऐसी कोख जिसमें दफ्न हो सकूं मैं ! कह सकें वे वह कुछ जो कहा ...
Sunday, July 30, 2017

आजकल

›
हर तरफ धूल है धुँआ है गुबार है। गर्द इतिहास की चुभ रही है पलकों में। वर्तमान का पानी धुले स्पष्ट कर दे सब गर्द हालाकिं वह खुद...
1 comment:
Saturday, July 1, 2017

फोन

›
चलो . . . ! ! ! थोड़ी देर . . . साथ रहें ! एक दूसरे को फोन करें  और...  हैलो भी ना बोलें । बहुत देर तक चुप रहें . . . और बिना  कुछ ...
Monday, June 20, 2016

भींगी घरती पहली बरखा!

›
भींगी धरती पहली बरखा, गीले पेड़ गीले पात नीला अम्बर हुआ बादली, तपती पछुआ हुयी सुरीली, मस्त मेढ़कों की ...
3 comments:
Sunday, March 13, 2016

नागा लोककथायें:अरमेजंग और उसके दामाद लेटरसंग की कथा

›
Ang Chief Women, 1954 Copyright Protected  “ मां का असीम प्यार " (पिछली कहनी देखें) नामक पुरानी कहानी में हमें पता चला कि एक मृता...
1 comment:
Saturday, December 19, 2015

नागा लोककथायें: मां का असीम प्यार (Ever Abiding love of a Mother)

›
A Chang Woman carrying her child. 19954. Copyright Protected  आओ नागओं की पुरानी परंपरा कहती है कि मृत व्यक्तियों के शरीर घर के बाहरी ...
Friday, October 30, 2015

पोषण के बारे में ...

›
फल सब्जी दूध किसमिस में ही नहीं, कुछ  विटामिन्स   तो सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे होठों में होते हैं ..... चुप ताजे  ललछहूं  ...
Friday, September 11, 2015

नागालैण्ड की लोककथायें: एक लड़की की कथा जिसे सर्प दंश से मरना था !

›
एक बार की बात है एक परिवार रहता था जिसमें सिर्फ दो ही बच्चे थे. उन दिनों एक बार घर का मुखिया माथा लेने ( नर-मुण्ड शिकार अभियान पर) गय...
3 comments:
‹
›
Home
View web version

आत्मकथन

My photo
अभिषेक आर्जव
बनारस,दिल्ली , India
"हार कर हर मोरचे पर/ जीत ही मैं लिख रहा हूँ, आज के इस दौर में भी, गीत ही मैं लिख रहा हूँ....... ."
View my complete profile
Powered by Blogger.