Wednesday, August 5, 2015
नागालैण्ड की लोक कथाएं : कोढ़ी का इलाज
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(लोक को समझने का एक उपयुक्त माध्यम हो सकती हैं लोककथायें. नागालैण्ड के मोकोकचुंग शहर में घूमते हुये मिली एक छॊटी सी पुस्तक में आई. बेन...
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Sunday, August 2, 2015
धर्म एक तवायफ़ है।
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संस्थागत धर्म एक तवायफ़ है। राजनीति के कोठे पर नाचा करती है। रसूख की लार से गीली कर उसकी देह सत्ता के ठेकेदार करते हैं दानवी उपभोग। ...
Sunday, May 3, 2015
चार पैरों वाला दूलहा
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वो हंसती भी थी रोती भी थी। एक ही साथ। घरवालों ने आज ही तय किया था खरीदना उसके लिए एक चार पैरों वाला इन्जिनीयर दुलहा। नीलामी पूरी प...
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Thursday, April 30, 2015
कविता में
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जब दुनिया गर्म हो चुकी होगी बहुत तब भी थोड़ी ठण्डक बची रहेगी कविता में। जब ऊपर नीचे चहुंदिश होगी ध्वनि ही ध्वनि जीवन के एकमात्र नि...
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Monday, April 27, 2015
शान्त सतह
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ऊपर की शान्त सतह से कहाँ पता चलता है क्या क्या कुछ है गहरे अन्तर ! देखो तो.. धरती.. सागर.. पेड़.. पहाड़ और खुद तुम ही देखो तो...
Thursday, April 23, 2015
किसान के बारे में बिलकुल नहीं
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हर संवेदना के अपने भगवान होते हैं दरी के नीचे अखबार से काटकर छुपाए हुए भगवान ! घुस आते हैं जो संवेदक की सहस्र वर्ष ...
Wednesday, April 22, 2015
अन्ततः
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मैं जानता हूँ रह जाऊँगा अकेले किसी रात जैसे सबसे अन्त में बचा रह गया कोई पानी का छर्रा छहर छहर हुई बारिश बाद। पता है मुझे टूटन...
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Monday, February 2, 2015
हिन्दी
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ध्वनि ,शब्द और अर्थ से परे बस एक भाषा ही नहीं हिन्दी ! तुम एक जागृत संवेदना वृत्त हो , अभिव्यक्ति के नवीन सोपानों में हम...
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Sunday, December 21, 2014
एक सपना
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कल रात भोर में एक सपना आया मुझे. मैंने देखा कि मैं एक ऐसे जंगल में खॊ गया हूं जहां सिर्फ बड़े बड़े विद्वान, बुध्दिवीर रहते हैं। अलग अलग ...
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