आर्जव
Friday, July 6, 2012

“कालिंग”……..

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नये वाले मोबाइल के भी कान्टैक्ट में सेव हैं कुछ पुराने, बन्द पड़े ,  आऊट आफ़ सर्विस, नम्बर  ! अपरिचित अन्धेरों और असम्बद्ध...
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Saturday, April 7, 2012

फिर से प्यार ...

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(यह समयान्तर में छ्प चुकी एक पुरानी कविता है) चलो छॊड़ो जाने दो अब वह बड़ा वाला प्रेम , वो सच्चा और गहरा वाला प्रेम , वो निर्म...
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Tuesday, September 6, 2011

अन्ना को समय ने रचा है ।

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अन्ना को समय ने रचा है । वह बहरा नहीं है । संस्कृतियों के मेले से छांटकर समय   अपनी उत्तुंग प्राचीर पर   ...
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Saturday, July 30, 2011

विस्मृत....... सदा के लिये !

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दर्द ठीक हो गया तो बची रह गयी अगली खुराक , मेज पर पड़ी है धूल फांकती , किसी दिन फेंक दी जायेगी एक अर्थहीन निर्मम सहानुभूत...
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Friday, May 13, 2011

फिर कभी !

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खुद ही सब कुछ छोड़ आये हैं फिर भी एक कतरा बेजुबान सी उम्मीद है कहीं कि   वहां से आवाज आयेगी फिर कोई ! सबको पहचानते ...
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Tuesday, March 22, 2011

समय बच गया था

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समय बच गया था, अनवरत गुजरते हुये हर द्वार पर से बिना प्रतीक्षा किये किसी की भी कुछ की भी ! अहर्निश गतिशील रहते हुये भी समय बच गया था धुले ...
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Friday, February 4, 2011

अनुपस्थिति (२)

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कमरा सब तरफ से बन्द था फिर भी न  जाने  कहां  से ठण्डी   हवा    आती   रही ! नब्ज रोककर पूरा    बदन सिकोड़े हुये हर कतरा हवा का दूर फेंक आया...
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Thursday, January 27, 2011

अनुपस्थिति

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ढलते……उदास….दिन ! खाली साझें……सन्नाटा ! तेज चलती….रूखी…हवाएं ! बन्द गलियारों में बिखरे सूखॆ ,खड़खड़ाते पीले पत्ते ! कहीं ये तुम्हारी याद ...
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Wednesday, January 12, 2011

दुनिया चलती रहती है !

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यह दुनिया चलती रहती है ! चलती रहती है और चलती रहती है ! क्योंकि इस दुनियां में बहुत से अच्छे साफ दिल लोगों ने बड़े ...
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आत्मकथन

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अभिषेक आर्जव
बनारस,दिल्ली , India
"हार कर हर मोरचे पर/ जीत ही मैं लिख रहा हूँ, आज के इस दौर में भी, गीत ही मैं लिख रहा हूँ....... ."
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