जरूरी नहीं कि हृदय में ईश्वर का प्रकाश ही आपको व्यावहारिक तौर पर स्थिर, गंभीर, आत्मप्रवृत्त बनाता हो। अपने चित्त के घामड़पन, अपनी कुटिलता की शक्ति में निर्द्वन्द व अटल विश्वास भी व्यक्ति को वाह्य तौर पर उतनी ही स्थिरता देता है जितना कि वास्तविक सत्य का बोध।
उदाहरण के लिए आप अपने आसपास के तमाम बड़े-छोटे मठाधीशों को देख सकते हैं।
Thursday, November 22, 2018
मठाधीशी की कला
Saturday, November 3, 2018
पहले जैसे
पत्नी नौकरी फ्लैट कार
प्रमोशन के लिए प्रतिस्पर्धा परीक्षा
आफिस की तक झक
नहीं हो रही सेविंग से लेकर
कई दिनों से छूट जा रही जिम
और समय न मिलने से
न हो पा रहे मेडीटेशन की चिन्ता के बीच
मैं अक्सर सोचा करता हूं कि
पहले जैसे
कविताएं भी लिखा करूं !
लेकिन !
सिर्फ सोचने से क्या होता है ?
बताईए !
प्रमोशन के लिए प्रतिस्पर्धा परीक्षा
आफिस की तक झक
नहीं हो रही सेविंग से लेकर
कई दिनों से छूट जा रही जिम
और समय न मिलने से
न हो पा रहे मेडीटेशन की चिन्ता के बीच
मैं अक्सर सोचा करता हूं कि
पहले जैसे
कविताएं भी लिखा करूं !
लेकिन !
सिर्फ सोचने से क्या होता है ?
बताईए !
सपना
अक्सर जब कोई सपना
सच हो कर आंखों के सम्मुख आता है
आंखें उन्हें चीन्ह नहीं पाती हैं !
आखों के अधूरेपन में
सपना सपना ही रह जाता है !
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सच हो कर आंखों के सम्मुख आता है
आंखें उन्हें चीन्ह नहीं पाती हैं !
आखों के अधूरेपन में
सपना सपना ही रह जाता है !
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