Sunday, August 9, 2015

नागालैण्ड की लोक कथायें : कोढ़ी का इलाज ( खण्ड 3)

नागालैण्ड की लोक कथायें : कोढ़ी का इलाज ( खण्ड २)

............जारी.

उस जवान का गांव वापस आना एक सपने जैसा ही था. उसके सगे सम्बन्धियों ने उसका खूब स्वागत किया. उसने लोगों को उत्साहपूर्वक बताया कि किस तरह पेर (सांप) के दिखाये गये जादूयी पौधे से उसने अपनी भयानक बिमारी का इलाज किया. इस अवसर पर सभी ने ध्यानपूर्वक पौधे के बारे में जानकारी ली. और प्रसन्नतापूर्वक सर्वशक्तिशाली ईश्वर को धन्यवाद दिया जिसने अपने सेवकों को सांप के द्वारा एक भयानक बीमारी से ठीक होने का रास्ता दिखाया.
वस्तुतः सर्वशक्तिशाली ईश्वर के इस गहन प्रेम के
लिए पूरे गांव ने खूब उत्सव मनाया.

इसके बाद वह व्यक्ति अपने पुराने दिनों की तरह , रोज रात अरेजू (लड़कियों का छात्रावास) गया. वहां उसने लड़कियों के व्यवहार में बहुत परिवर्तन महसूस किया. पुराने दिनों से अलग, घुसते ही , लड़कियों ने उसे आग के पास वाला स्थान बैठने के लिये दिया. लेकिन उसने बैठने के लिए वह स्थान लेने से इन्कार कर दिया और पुराने दिनों की तरह वह कमरे के एक कोने में बैठा. इससे तुरन्त ही लड़कियां आंसू बहाने लगी. जल्द ही सबने आंसू पोछे और एक दूसरे से बहाना किया कि धुंए की वजह से उनके आंसू निकलने लगे थे.


जल्द ही उस व्यक्ति ने शादी कर ली और सभी बीमारियों से आजाद एक सुखी घर बसाया, अपने बुरे अतीत को भुलाकर. उस आदमी का नाम लामसंग था. और वह जिस गुफा में रहा था उसे अब लामसंग यदेन कहा जाता है. यह गुफा अब भी उंग्मा गांव के पास लामसंग रोगी के दुख व कठिनाई की कहानी कहती , स्थित है. 
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