Monday, May 27, 2013

पत्तों पर ओस


Knitting Girl, 1869अनाम दिन किसी शाम
छोड़ आये जो तुम
उस अजान पेड़ से बतियाने में भूलकर उसपर
थोड़ा सा गौरैया के छोटे बच्चे सा प्यार
वह प्यार के दो चमकीले मोती बन अब
दो सीपी सी आंखों में बस गया है !

उस दिन हवा की कॊठरी में
टहलते वक्त कच्ची दोपहर को
गीली हवा के ताखॊं पर रख आये  तुम
प्यारी सपनीली बातों की दो पुड़िया !
वह भी मधुरी चिठ्ठी बन
दो कानों में बजती रहती है !

देखॊ !
उस दिन अजाने
नीले फूलॊं के गुच्छे को
भर आंखॊं में भर सांसॊं में
दुलराया था जो तुमने
वह भी
घने नेह की मृदुल डली सा
उस एक हिये में
अंजता रहता है !