Tuesday, June 2, 2009

भागो !



(मन ने मन से कहा --)

मत लड़ो ।
हार जाओगे ।


दुख से लड़ा जा सकता है ।
अहंकार , ईर्ष्या ,द्वेष व क्रोध
सभी से लड़ा जा सकता है ।

लेकिन…..
मत लड़ो ,
हारोगे ।
वह रूप बदल कर आया हुआ
विशुद्ध आनन्द है ।

लड़ा नहीं जा सकता उससे ।
अपराजेय है वह ।


भागो !