Thursday, May 28, 2009

मिलन


प्रणय का उत्कर्ष जो है
स्वप्न का उल्लास जो है ,
सोचता हूं कैसा होगा वह मिलन !!!


आशाओं का आलम्ब जो है
प्रेरणाओं का उद्‍गार जो है
सत्य का सन्धान जो है
असत्य का स्वीकार जो है ,
सोचता हूं कैसा होगा वह मिलन !!!


प्रछन्न दो अस्तित्व जो है
विलग चेतना के व्यापार जो हैं
मध्य के अवकाश जो है
प्रत्येक का जब होगा उन्न्यन ,
सोचता हूं कैसा होगा वह मिलन !!!


प्रत्येक क्षण एक प्रयास जो है
स्पर्श की अभिलाष जो है
उत्क्षिप्त मन के भटकाव जो है
सभी का जब होगा उन्मीलन
सोचता हूं कैसा होगा वह मिलन !!!