Thursday, May 7, 2009

चरित्रहीनता

अनियमितता
ही
चरित्रहीनता है !!!!!

Sunday, May 3, 2009

जीत

जो जीत मिली है तुम्हें
और जिस पर तुम इतने प्रफुल्लित हो
उसे बस लोगों को दिखाने के लिये
अपने घर के दरवाजे पर
बांस लगाकर टांग मत देना !
या खो देने के डर से उसे छुपाकर
पुराने लकड़ीवाले घुने लगे संदूक में न रख देना ।

उसे निकालना
और बिलकुल अपने पास ,हाथ में ले
इधर उधर पलट कर देखना , निरखना !
पूर्वाग्रहों और लिप्साओं को कुछ क्षण के लिये स्थगित कर
उसे फिर से दो चार बार और देखना ।

यदि यह देखना सच्चा हुआ
तो
तुम्हारी इस जीत में , जिस पर तुम इतने प्रफुल्‍लित हो,
कई ऎसे छेद आयेगें
जहां से जीत का वह लोंदा बिलकुल हार जैसा दिखेगा ।
उपलब्धियों का वह टीला
जिस पर तुम्हारे अभिमान की नींव है , रेत के ढ़ूह सा बिखर जायेगा !
आस पास के लोगों से मिलती
प्रशंसाएं प्रेरणाएं व सम्मान सब
चिम्पैजियों की बकवास चिचियाहटों से लगेंगे !


जरा देखना ध्यान से ,
एक बार और ।